रविवार, 4 दिसंबर 2011

मन की आंखों से दौड़ लगाकर नीलूमति ने जीता गोल्ड मैडल



गरियाबंद। सफलता पाने में कुछ भी बाधक नहीं बन सकता। फिर चाहे नेत्रहीन बालिका का खेल के मैदान में जौहर दिखाने की बात ही क्यों न हो। यह साबित किया है यहां की नेत्रहीन छात्रा नीलूमति चुरपाल ने। राजधानी में हुए दौड़ स्पर्धा में उसने १०० मीटर में अव्वल आकर गोल्ड मैडल हासिल किया। जबकि २०० मीटर दौड़ में दूसरे नंबर पर रहकर सिल्वर मैडल पाया। अब वह नेशनल खेलने के लिए १६-१७ को बेंगलुरू जा रही है।
कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय के आरबीसी सेंटर में वह कक्षा पांचवीं में पढ़ती है। गोल्ड मैडल मिलने पर खुशी जाहिर करते हुए नीलू ने कहा कि नेत्रहीनों को समाज में सम्मान कभी नहीं मिलेगा वह ऐसा सोचती थी, लेकिन आंखें न होने के बावजूद नेशनल स्तर पर खेलने जाना उनके लिए गौरव से कम नहीं है। इसके लिए उसने स्कूल प्रशासन को श्रेय दिया। राज्य स्तरीय नि:शक्त पैरालंपिक एथलेटिक्स स्पर्धा ५ से ७ नवंबर को समाज कल्याण विभाग ने किया था। छात्रा ने जिले की ओर से प्रतिनिधित्व किया, जिसमें सब जूनियर वर्ग में ८-१४ वर्ष में १०० मी दौड़ प्रतियोगिता में प्रथम गोल्ड मैडल व २०० मीटर में सिल्वर मैडल से सम्मानित की गई। उसकी सफलता पर आश्रम अधीक्षिका चंद्रप्रभा फुलझेले, बीआरसी प्रभारी अमर दास कुर्रे और शिक्षिका शीला यादव ने खुशी जाहिर की है।



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