गुरुवार, 2 फ़रवरी 2012

बाबू व्यक्ति नहीं विचारधारा का नाम है



धमतरी। स्व. बाबू पंढरीराव कृदत्त एक व्यक्ति का नाम नहीं है बल्कि एक विचारधारा का नाम है। समाजसेवक के रूप में उन्होंने जो कार्य किया है वह सभी के लिए अनुकरणीय है। उनके कार्यों को शब्दों में समेट पाना मुश्किल है। यह बातें स्व. बाबू पंढरीराव कृदत्त की पुण्यस्मृति में आयोजित व्याख्यान माला में मुख्य अतिथि विधानसभा अध्यक्ष धरमलाल कौशिक ने कही।
आमातालाब रोड स्थित सरस्वती शिशु मंदिर सभागार में  आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते उन्होंने कहा कि बाबूजी के नेतृत्व में भारतीय जनसंघ को बीजेपी के रूप में मार्गदर्शन मिला है। कहते हैं कि जब दाएं हाथ से दान किया जाए तो बाएं हाथ को खबर नहीं होनी चाहिए। पर आज के समय में लोग दान कम प्रचार ज्यादा करते हैं। बाबूजी ने जीवनभर लोगों की खुले दिल से सेवा की। उनके सहयोग से कोलियारी सहित कुछ अन्य स्थानों पर संचालित संस्थान आज भी कार्यरत हैं।
राजनीति को वे समाजसेवा का माध्यम मानते थे। उनसे जो व्यक्ति मिला वह उन्हीं का हो गया। उनके विचारों से ही आज की राजनीतिक कटुता को भुलाकर राजनीतिक शुचिता लाई जा सकती है। स्व. बाबू पंढरीराव कृदत्त स्मृति मंच ने जो यह आयोजन किया है, वह प्रशंसनीय है। अगले साल जब यह आयोजन हो तो अविभाजित मध्यप्रदेश के जिन लोगों ने बाबूजी के साथ काम किया था, उन्हें भी इस कार्यक्रम में निमंत्रण दिया जाना चाहिए। कार्यक्रम की अध्यक्षता नि:शक्तजन आयोग के अध्यक्ष इंदर चोपड़ा ने की। श्री चोपड़ा ने बाबू जी को महान, विचारवान एवं चिंतनशील व्यक्ति बताते हुए उनके व्यक्तित्व पर अपने विचार रखे।
विशिष्ट अतिथि के रूप में श्रम कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष अरूण चौबे, जिला पंचायत अध्यक्ष बालाराम साहू, नपाध्यक्ष डॉ.एनपी गुप्ता, उपाध्यक्ष चित्ररेखा निर्मलकर थे। अन्य अतिथियों ने भी संबोधित किया। कार्यक्रम में जानकीदेवी पवार, सविता यादव, शारदा साहू, अनिता सोनकर, पूजा कुंजाम, विथिका विश्वास, चंद्रकला पटेल, संतोष यादव, अनिल यादव, रामभगत यादव, कुमार रणसिंह, वामनराव मगर, कुलेश्वर सोनी, राधे साहू, कमलकिशोर, महेश साहू, जयराम, युगलकिशोर साहू, मोहित नारायण, दिलीप राज सोनी, राजेन्द्र शर्मा, एआर थिटे, डोमार सिंह, दयाशंकर सोनी, कल्पना रणसिंह, अवधराम साहू, मालकराम साहू, हरीशचंद्र साहू, श्यामसुंदर यादव, चोखाराम देवांगन, अवधराम साहू, टीकाराम निर्मलकर, विसंभर निषाद, अजीत साहू, राजेन्द्र सिन्हा, बेनीप्रसाद तिवारी, शिवप्रसाद साहू, शिशुपाल महमल्ला, ललित सिन्हा, सुंदरलाल सिन्हा उपस्थित थे।
 बाबू पंढरीराव कृदत्त की तृतीय पुण्यतिथि पर भाजपा कार्यालय में उनके चित्र का अनावरण एवं स्थापना कर माल्यार्पण किया गया। मुख्य अतिथि वरिष्ठ भाजपा नेता गजराज जैन थे। अध्यक्षता वरिष्ठ नेता सन्मुखदास पंजवानी ने की।
नूतन उमावि : 
नूतन उमावि में भी पुण्यतिथि पर कार्यक्रम का आयोजन हुआ। मुख्य अतिथि श्याम अग्रवाल थे। अध्यक्षता प्रकाश गोलछा ने की। विशिष्ट अतिथि शारदाप्रसाद शर्मा, गुणवंत राव बाबर, शिवाजी राव कृदत्त, जी.पटेल उपस्थित थे। मुख्य अतिथि श्याम अग्रवाल ने इस अवसर पर कहा कि स्व.बाबूजी का व्यवहार आत्मिक था। स्कूल में निबंध प्रतियोगिता भी रखी गई थी।

अभाविप ने धरना देकर सौंपा ज्ञापन


जांजगीर-चांपा। केंद्रीय गृहमंत्री पी चिदंबरम से इस्तीफे की मांग व उन पर कार्रवाई को लेकर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने जिला मुख्यालय के कचहरी चौक में धरना दिया। इसके बाद राष्ट्रपति के नाम तहसीलदार को ज्ञापन सौंपा गया।
छग प्रांत सहमंत्री जितेन्द्र देवांगन ने कहा कि देश में हो रहे बड़े घोटाले केन्द्र सरकार सहित उनके मंत्रियों द्वारा किए जा रहे हैं और २००३ के २जी स्पेक्ट्रम घोटाले में ए राजा के साथ तत्कालीन वित्त मंत्री पी चिदंबरम भी शामिल थे। संसद की गरिमा एवं राष्ट्रहित को देखते हुए अभाविप पी चिदंबरम से इस्तीफे की मांग करती है। जिला सह संयोजक अभिमन्यु राठौर ने कहा कि केन्द्र सरकार के एक प्रमुख मंत्री, जिसे उन्होंने केंद्रीय गृहमंत्री का दर्जा दिया है, वे भी २जी स्पेक्ट्रम घोटाले में संलिप्त हैं। कार्यक्रम को नगर मंत्री राहुल सेन, नगर संयोजक शिव कश्यप, शिवशंकर यादव, सुदीप उपाध्याय, नीलांशु ने भी संबोधित किया। कार्यक्रम का संचालन प्रांतीय सदस्य प्रीतम केशरवानी व आभार प्रदर्शन प्रांतीय सदस्य अजीत पटेल ने किया। इस अवसर पर राजेन्द्र साहू, आकाश तिवारी, प्रयांश, मणीकांत, अरविंद, कालू, लोकेन्द्र, आकाश राठौर, पीयुष, आनंद सोनी, अजीत, राहुल, विजयेन्द्र, ललित, देव दवांगन, मुरारी प्रधान, भीम प्रसाद, ओमप्रकाश साहू, मनोज सोनवानी, अमित,सरवन, मयंक, प्रदीप सिंह सहित जिले अन्य कार्यकर्ता बड़ी संख्या में उपस्थित थे।

किसानों का प्रयास रंग लाया



धमतरी। इंदिरा गांधी कृषि विवि रायपुर, जिंदल स्टील एवं पावर लिमिटेड रायपुर के संयुक्त तत्वावधान में राष्ट्रीय हार्टिकल्चर मिशन छग के सहयोग से गांधी उद्यान रायपुर में पुष्प, फल एवं सब्जी प्रदर्शनी का आयोजन किया गया। निदेशक विस्तार सेवाएं इंदिरा गांधी कृषि विवि रायपुर के निर्देशन में कृषि विज्ञान केन्द्र धमतरी के प्रयास से सब्जियों के खेती करने वाले जिले के चार नवोन्वेशी कृषकों ने धान के अतिरिक्त सब्जियों की खेती के नमूने को फलैक्स व प्रदर्शन के माध्यम से प्रदर्शित किया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि राज्यपाल शेखरदत्त, डीएस के पाटिल कुलपति इंदिरा गांधी कृषि विवि रायपुर ने कृषकों के नवीन कार्य की अवलोकन किया।
कृषक योगेश्वर निर्मलकर ग्राम पुरी ने विकलांग होने के बावजूद डॉ. जीके अवधिया इंदिरा गांधी कृषि विवि रायपुर व कृषि विज्ञान केन्द्र धमतरी द्वारा आयोजित प्रशिक्षण से अपने घर पर मशरूम बीज बनाकर बीज की समस्या को दूर किया है। कृषक हीरालाल साहू ग्राम पुरी ने धान के बाद शकर कंद, करेला, भिंडी, मटर, दुग्ध उतपादन के साथ मशरूम उत्पादन को अपनाकर मशरूम आचार, मशरूम बड़ी, मशरूम पावडर बनाकर मानव पोषण की कमी को दूर करने का प्रयास किया है। कृषक पंचुराम साहू ने टमाटर, हल्दी, बैगन, बरबटी, मेड़ों में सेम, करेला की खेती, केंचुआ खाद के साथ धान के बाद खेत में प्याज, कद्दू वर्गीय फसलों की खेती कर रहा है।
कृषक घनाराम सोनकर (ट्रिपल एमए)ग्राम लोहरसी ने बैगन के साथ प्याज भाजी, टमाटर के साथ मक्का की खेती एक ही मेड़ में फूलगोभी की दो कतार में खेती टपक सिंचाई को अपनाकर अपने व्यवसाय में और लोगों को व्यवसाय प्रदान कर रहा है। राज्यपाल ने चारों कृषकों की कार्यों की सराहना करते हुए उन्हें नवोन्वेशी कृषक का सम्मान देते हुए स्मृति चिन्ह प्रदान किया।

साइकिल नहीं शिक्षक चाहिए


दंतेवाड़ा। नारी पढ़ेगी, विकास गढ़ेगी-नारी शिक्षा को प्रोत्साहित करने सरकारी विज्ञापनों के अलावा कई आयोजनों में यह स्लोगन पढऩे और सुनने को जरूर मिलता है। प्रदेश सरकार ने भी इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए सरस्वती साइकिल जैसी योजना भी चला रखी है, परन्तु दक्षिण बस्तर में जहां विषम हालात के बावजूद बालिका शिक्षा को लेकर आदिवासी समाज में एक सकारात्मक सोच जागृत हुई है और इसके दूरगामी परिणाम भी देखने को मिल रहे हैं। शिक्षण संस्थाओं में लडक़ों के समतुल्य लड़कियां भी शिक्षाग्रहण करने पीछे नहीं हैं, परन्तु अध्यापन की समस्या से पढ़ाई में आ रही बाधा एक गंभीर समस्या है।
ब्लाक मुख्यालय कुआकोण्डा स्थित शासकीय कन्या उमावि में साइकिल वितरण कार्यक्रम में पहुंचे क्षेत्रीय विधायक भीमा मंडावी को अध्यापन की समस्या से अवगत कराते छात्राओं ने कहा कि उन्हें साइकिल नहीं वरन शिक्षक चाहिए। 
कक्षा ११ वीं की सरिता, प्रीति, कक्षा १२ वीं की नेहा विज्ञान संकाय की तीनों छात्राओं का कहना था कि परीक्षा सिर पर है और गणित, जीवविज्ञान, भौतिकी, रसायन जैसे महत्वपूर्ण विषयों के शिक्षक नहीं है। ऐन वक्त जब उन्हें इम्तहान की तैयारी करनी है तो दो शिक्षकों ने रिजाईन दे दिया है। जिससे कोर्स पूरा करने में भी वे पिछड़ गए हैं। वहीं परीक्षा की घड़ी भी नजदीक है, ऐसे में उनकी पढ़ाई भगवान भरोसे हैं। इस पर विधायक भीमा मंडावी छात्राओं को आश्वस्त किया कि शीघ्र ही शिक्षकों की व्यवस्था हो जाएगी। इधर नई दुनिया से चर्चा में विधायक का कहना है कि बच्चों की मांग जायजा है और यह उनका अधिकार भी है। इम्तहान की घड़ी में शिक्षकों का तबादला बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ है। प्रशासन को इस ओर ध्यान देने की जरूरत है। वे इस विषय में जिलाधीश से चर्चा जरूर करेंगे।

विवाद से परे है गीता



गत कुछ दिनों से रूस के टोम्स्क साइबेरिया में गीता पर प्रतिबंध लगाने की याचिका संबंधी विवाद चर्चा में है। हालांकि की याचिका खारिज हो गई, लेकिन लोगों का आक्रोश खत्म नहीं हुआ कि आखिर गीता पर प्रतिबंध की सोच किसकी है? गीता को अतिवादी या सामाजिक वैमनस्य फैलाने वाला ग्रन्थ कहना हतप्रभ करने वाला है। एक ग्रन्थ जो सिर्फ कर्म करने की बात पर जोर देता हो, धर्म की बात करता हो, असत्य पर सत्य की विजय और सिर्फ ईश्वर के ही परमसत्य होने की बात कहता हो, वह उग्र और अशांति फैलाने वाला कैसे हो सकता है?

आइए पहले गीता को जानें। विद्वान मानते हैं कि गीता वेदों और उपनिषदों का सार ग्रंथ है, जो किसी धर्म विशेष या व्यक्ति विशेष के लिए सीमित न होकर हर किसी के लिए जीवन दर्शन प्रस्तुत करता है। महाभारत के युद्घ में जब अर्जुन अपने भाइयों के विरुद्घ लडऩे की बात सोचकर युद्घ-मैदान में अत्यंत विचलित हो उठे, तब उनके सारथी बने भगवान श्रीकृष्ण ने उपदेश दिया था- क्यों व्यर्थ की चिंता करते हो? किससे व्यर्थ डरते हो? कौन तुम्हें मार सकता है? आत्मा न पैदा होती और न मरती है ।
तुम्हारा क्या गया, जो तुम रोते हो ? तुम क्या लाए थे जो तुमने खो दिया? तुमने क्या पैदा किया था, जो नाश हो गया? न तुम कुछ लेकर आए जो लिया यहीं से लिया, जो दिया यहीं पर दिया।

परिवर्तन संसार का नियम है, जिसे तुम मृत्यु समझते हो, वही तो जीवन है। एक क्षण में तुम करोड़ों के स्वामी बन जाते हो, दूसरे ही क्षण में तुम दरिद्र हो जाते हो । मेरा-तेरा, छोटा-बड़ा, अपना-पराया मन से मिटा दो, फिर सब तुम्हारा है, तुम सबके हो।
न यह शरीर तुम्हारा है, न तुम शरीर के हो । यह अग्नि, जल, वायु, पृथ्वी, आकाश से बना है और इसी में मिल जाएगा। परंतु आत्मा स्थिर है, फिर तुम क्या हो? उक्त सूत्र वाक्य पर हम गौर करें तो हम सभी के अंदर एक अर्जुन रहता है, असली कुरु क्षेत्र यानी युद्घभूमि भी हमारे अंदर ही है। अहंकार,लोभ, द्वेष और ईष्र्या ही हमारे असल शत्रु हैं और इन शत्रुओं को छोड़ मानवता को अपनाना ही गीता का सार है।

गीता को सिर्फ एक धार्मिक ग्रन्थ समझना बड़ी भूल होगी, क्योंकि इसमें प्रस्तुत विचार देश, काल, जाति से परे स्थितियों को विशाल, वृहद् परिप्रेक्ष्य में प्रस्तुत करता है, किसी को उद्वेलित या आक्रोशित करने के बजाय शांत रहकर कर्म करते रहने को प्रेरित करता है। कर्मयोग, ज्ञानयोग और भक्तियोग की सूक्ष्म विवेचना करता यह ग्रन्थ बदलते सामाजिक परिदृश्य में तो और अधिक महत्वपूर्ण साबित हो रहा है। जब सामान्य व्यक्ति जीवन की समस्याओं और संघर्षों में ‘‘करूं या न करूं,’’ ‘‘आगे बढूं या न बढ़ूं’’ के मकडज़ाल में उलझ अपने कर्तव्यों से पलायन कर अपने कम्फर्ट जोन में जमे रहने की बात सोचता है।

यह एक ऐसा ग्रन्थ है , जिसे शांति और अहिंसा के प्रतीक महात्मा गांधी प्रेरित हुए। स्वामी विवेकानंद ने अपने शिकागो भाषण में गीता को उद्घृत किया और आज आज के सभी नामचीन प्रबंधन गुरु भी गीता से अपनी मूल मंत्र बात उठाते हैं। मेरा मानना है कि गीता के विचार का प्रसार प्रोत्साहित किया जाना है, ताकि वर्तमान जीवन में तनाव को कुछ कम किया जा सके।

गीता का मूल तत्व जीवन ज्ञान है, जीवन दर्शन है, विश्व की लगभग सभी भाषाओं में इसका अनुवाद हुआ है। सोवियत रूस में भी यह कोई नवीन विमोचित ग्रन्थ नहीं है, बल्कि रूस में तकरीबन २०० वर्षों से भी ज्यादा समय से गीता वहां उपलब्ध है। १७८८ में ही गीता का रूसी अनुवाद प्रकाशित हो चुका था। इस लंबे अंतराल में गीता ग्रन्थ के कारण किसी अप्रिय घटना की जानकारी तो नहीं है, तो फिर ये नया शिगूफा क्यों?
- डॉ. जया तिवारी