सोमवार, 16 अप्रैल 2012

स्वास्थ्य - चावल भी औषधि है




कम ही लोगों को अंदाज़ा होगा कि चावल का औषधीय यानी दवा के रुप में भी इस्तेमाल हो सकता है। लेकिन अपनी जैव-विविधता के लिए विश्व के मानचित्र में अपना विशिष्ट स्थान रखने वाले छत्तीसगढ़ में उगाए जाने वाले चावल की कई ऐसी प्रजातियाँ हैं जिनका उपयोग स्थानीय समाज औषधि के रुप में करता आया है। छत्तीसगढ़ को धान के कटोरे के रूप में जाना जाता है। प्राचीन समय से ही यहाँ धान की प्राकृतिक किस्मों में बहुत अधिक विविधता है।

राज्य में औषधीय धान (मेडीसिनल राइस) की सैकड़ों किस्में उपलब्ध हैं -

इन दिनों इथनोबॉटनिकल सर्वेक्षणों और अध्ययनों के माध्यम से इन औषधीय धान की किस्मों के विषय में पारंपरिक ज्ञान का दस्तावेज़ीकरण किया जा रहा है। दरअसल अधिक उत्पादन देने वाली धान की किस्मों को प्रोत्साहन के कारण आम किसान औषधीय और सुगंधित धान को भूलते गए और आज इनकी खेती केवल कुछ भागों तक सीमित रह गई है।

पारंपरिक चिकित्सा :-

औषधीय धान का दैनिक जीवन में प्रयोग करने वाले पारंपरिक चिकित्सक ही इसकी खेती कर रहे हैं। इनमें से अधिकतर पारंपरिक  चिकित्सक उम्र के अंतिम पड़ाव में हैं और उनका अमूल्य ज्ञान उनके साथ ही समाप्त हो जाने की आशंका है।
छत्तीसगढ़ की प्रमुख औषधीय धान की किस्मों में गठुअन, भेजरी, आल्वा, लाइचा, रेसारी, नागकेसर, काली मूंछ, महाराजी, बायसुर आदि हैं। गठुअन का प्रयोग वात रोगों की चिकित्सा में होता है. आल्चा के दानों को पकाकर उन नवप्रसूताओं को दिया जाता है जिनके बच्चों को फोड़ा हो गया। करहनी का प्रयोग लकवा (पक्षाघात) से प्रभावित रोगियों की चिकित्सा में होता है। प्रसव के बाद ताक़त के लिए महिलाओं को महाराजी चावल खिलाया जाता है। नागकेशर का प्रयोग श्वांस संबंधी रोगों से ग्रस्त रोगियों के लिए वरदान माना जाता है। लाइचा के पकाए हुए दानों का प्रयोग माताएँ गर्भावस्था में करती हैं ताकि बच्चे को लाइचानाम· त्वचा रोग न हो। काली मूंछ का प्रयोग त्वचा रोगों की चिकित्सा में होता है। रेसारी का प्रयोग पशु चिकित्सा में बलवर्धक  के रूप में होता है. भेजरी नामक किस्म का प्रयोग प्रसव के बाद जरायु (प्लेसेंटा) को जल्दी निकालने के लिए गायों को गुड़ के साथ खिलाया जाता है। इसके अलावा सैकड़ों ऐसी किस्में प्राकृतिक रूप से उपस्थित है जिनके विषय में पारंपरिक ज्ञान का दस्तावेजीकरण अभी तक नहीं किया गया है।

उत्पादन की समस्या :-

औषधीय धान की किस्मों के अलावा इस पर आक्रमण करने वाले कीटों, इसके साथ उगने वाले खरपतवारों और इसकी मिट्टी सभी का प्रयोग पारंपरिक चिकित्सा में औषधि के रूप में होता रहा है। औषधीय धान से कई तरह के पारंपरिक व्यंजन भी तैयार किए जाते हैं। ये व्यंजन न केवल स्वादिष्ट होते हैं बल्कि स्वास्थ्यवर्धक भी होते हैं। दिक्कत यह है कि इन किस्मों का उत्पादन बहुत कम है. इसकी वजह से ही किसानों ने इसका उत्पादन धीरे धीरे बंद कर दिया है।
ग्राम पौंडसरी के वनौषधी कृषक दीनदयाल वर्मा औषधीय धान की किस्मों के संरक्षण एवं संवर्धन के हिमायती हैं। उनका मानना है, इस विशिष्ट धान को प्रोत्साहन छत्तीसगढ़ को विश्वस्तर पर प्रसिद्धि दिलवा सकता है. साथ ही किसानों द्वारा की जा रही धान की कम लाभप्रद खेती को अधिक आमदनी वाला खेती बना सकता है।

चावल की किस्में और उपयोग

करहनी - लकवा
महाराजी - प्रसव के बाद शक्ति के लिए
नागकेश्लर - श्वास संबंधी रोग
कालीमूँछ - त्वचारोग
लाइचा - गर्भस्थ शिशु के त्वचा रोग
रेसारी - पशु चिकित्सा
इस विशिष्ट धान को प्रोत्साहन छत्तीसगढ़ को विश्वस्तर पर प्रसिद्धि दिलवा सकता है. साथ ही किसानों द्वारा की जा रही धान की कम लाभप्रद खेती को अधिक आमदनी वाला खेती बना सकता है।

प्रेमलता सबसे ऊंची चोटी माउंट एकॉनकागुआ फतह करेगी


जमशेदपुर। दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट को फतह करने वाली भारतीय महिला श्रीमती प्रेमलता अग्रवाल आगामी २७ जनवरी से अमेरिकी महाद्वीप की सबसे ऊंची चोटी माउंट एकॉनकागुआ को फतह करने के लिये अभियान शुरू करेगी।

एवरेस्ट पर एक ही दिन चढ़े ११ भारतीय

६ मई २०१० को लगभग ४५ वर्ष की उम्र में प्रतिकूल मौसम के बावजूद ऊंची एवरेस्ट पर चढ़कर एक  नया इतिहास रचने वाली सबसे उम्रदराज यह महिला अपने नये अभियान के तहत दक्षिण अमेरिका में एंडीज पर्वतमाला की करीब २२८४१ फुट ऊंची चोटी माउंट एकॉनकागुआ पर चढ़ेगी। चिली की सीमा से सटे अर्जेंटीना स्थित यह चोटी उत्तरी तथा दक्षिणी अमेरिका दोनो की सबसे ऊंची चोटी है।
प्रेमलता के माउंट एवरेस्ट अभियान को प्रायोजित करने वाली टाटा स्टील ही उनके इस अभियान को भी प्रायोजित कर रही है। टाटा स्टील से मिली जानकारी के अनुसार इस अभियान में प्रेमलता के साथ एक  आदिवासी महिला बिनीता सोरेन तथा आदिवासी पुरूष पर्वतारोही मेघलाल महतो भी होंगे।
उन·ा अभियान १७ फरवरी को समाप्त होगा। देश के प्रमुख औद्योगिक नगर जमशेदपुर की निवासी प्रेमलता एवरेस्ट चढऩे वाली झारखंड की पहली महिला हैं।

स्कूलों में भ्रष्टाचार विरोधी पाठ


नईदिल्ली। भ्रष्टाचार के खिलाफ सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे द्वारा चलाई गई मुहिम का असर केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) पर भी दिखने लगा है। आयोग ने देश में भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने के लिए बच्चों एवं युवाओं को जोडऩे का सुझाव दिया है।
भ्रष्टाचार पर नजर रखने वाली संस्था सीवीसी ने पाठ्यक्रमों में भ्रष्टाचार निरोधक पाठ को शामिल करने की सिफारिश की है। ताकि बच्चों में नैतिक मूल्यों और ईमानदारी को बढ़ावा देने के साथ भ्रष्टाचार के दुष्प्रभावों से अवगत कराया जा सके । सीवीसी के एक अधिकारी ने कहा, हमने बच्चों के स्कूली पाठ्यक्रम में नैतिक मूल्यों से संबंधित पाठ जोड़े जाने की सिफारिश की है। कई विकासशील देशों में ऐसा किया भी जा रहा है।

होगी जनता की जीत


डॉ सुब्रमनियन स्वामी बताते है की  सर्वोच्च न्यायलय ने यह सिद्ध कर दिया है की देश में जो भ्रष्टाचार के खिलाफ जो युद्ध चल रही है उसमे जनता की जीत होगी। वो कहते है ‘‘प्रिवेशन आफ  करप्शन  एक्ट’’ के सेक्शन ९ के अनुसार किसी भी मंत्री के खिलाफ मुकदमा चलाने के पहले हमे प्रधान मंत्री या मुख्यमंत्री की अनुमति लेनी होती है। इसके कारण अनुमति मिलने में काफी देरी होती थी।
ए.राजा के सवाल पर प्रधान मंत्री ने १६ महीने तक कुछ नहीं किया और स्वामी को झूठ कहा की सी.बी.आई. इस मामले को देख रही है। नयायालय ने कहा की ४ महीने के अन्दर प्रधानमंत्री या राज्यों में मुख्या मंत्री को अनुमति देनी होगी।

राष्ट्रीय ध्वज को जमीन पर फेंका


सीतापुर। उत्तरप्रदेश के सीतापुर जिले में एक मदरसे के प्रधानाचार्य सहित तीन व्यक्तियों को राष्ट्रीय ध्वज का अपमान करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। पुलिस सूत्रों ने बताया कि सीतापुर के पुराने शहर इलाके के मदरसा अरबियां फैजुल उलूम में राष्ट्रीय ध्वज लगभग दो घंटे तक  जमीन पर पड़ा रहा, मगर प्रधानाचार्य ने उस तरफ कोई ध्यान नहीं दिया। आरोप है कि राष्ट्रीय ध्वज को मदरसे के प्रधानाचार्य एखलाख अहमद के चचेरे भाई मोहम्मद हाशिम ने ही जमीन पर फेंक दिया था। इस संबंध में तीन लोगों को गिरफ्तार कर राष्ट्रीय ध्वज अपमान अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज कर कार्यवाही की जा रही है।

४८५ ‘‘गांधी’’ का एक साथ परेड, बना विश्व रिकार्ड



कोलकाता में ४८५ बच्चों ने महात्मा गांधी के  वेश में शांति पदयात्रा कर गिनीज बुक  ऑफ वर्ल्ड  रिकार्डस में नाम दर्ज कराया. लोगों ने पहली बार इतने सारे ‘‘गांधीजी’’ को  एक  साथ देखा।
मायो रोड स्थित गांधीजी की  प्रतिमा के समक्ष से निकाली गयी इस शांति पदयात्रा को ‘‘उठो, जागो’’ नाम दिया गया. इसमें १० से १६ वर्ष तक  के बच्चों ने भाग लिया. अधिकांश बच्चे गरीब परिवार से थे। यह शांति पदयात्रा महात्मा गांधी की  पौत्री उषा गोकानी की  मौजूदगी में निकाली गई।
गिनीज बुक  ऑफ वर्ल्ड  रिकार्डस के  भारत में अधिनिर्णायक निखिल शुक्ला ने कहा, ‘‘नया विश्व रिकॉर्ड कायम करने के लिए किया गया यह प्रयास सफल रहा. आप एक पखवाड़े के अंदर यह नया रिकॉर्ड हमारी वेबसाइट ‘‘डब्ल्यूडब्ल्यूडब्ल्यू.गिनीजवल्र्ड रिकार्डस.कॉम’’ पर पा सकते हैं।’’

अमेरिका के हवाई में २० फीट हनुमान की प्रतिमा



बेंगलुर। भगवान हनुमान की  ए २० फुट प्रतिमा को  अमेरिका के  हवाई में निर्माणाधीन सेन मारगा इरइवन हिन्दू मंदिर में स्थापना के लिये ले जाया जायेगा। र्नाटचित्रला परिशिष्ठ के ए छात्र  द्वारा निर्मित भगवान हनुमान की इस प्रतिमा को अमेरिका ले जाने से पहले अगले सप्ताह यहां लगने वाले चार दिवसीय १०वें अंतर्राष्ट्रीय ग्रेनाइट मेले में जनता के लिए रखा जायेगा। मुड़े हुये १००० टन ग्रेनाइट के पत्थरों से बनी यह मूर्ति हनुमान की  शक्ति को दर्शाती है।